कसप / Kasap Manohar Shyam Joshi

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Hardcover

312 pages


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कसप / Kasap  by  Manohar Shyam Joshi

कसप / Kasap by Manohar Shyam Joshi
| Hardcover | PDF, EPUB, FB2, DjVu, talking book, mp3, RTF | 312 pages | ISBN: | 10.14 Mb

कसप लिखते हुए मनोहर शयाम जोशी के आंचलिक कथाकारों वाला तेवर अपनाते हुए कुमाऊँनी हिनदी में कुमाऊँनी जीवन का जीवनत चितर आँका है। यह परेमकथा दलिददर से लेकर दिवय तक का हर सवर छोडती है लेकिन वह ठहरती हर बार उस मधयम पर है जिसका नाम मधयवरग है। एक परकार से मधMoreकसप लिखते हुए मनोहर श्याम जोशी के आंचलिक कथाकारों वाला तेवर अपनाते हुए कुमाऊँनी हिन्दी में कुमाऊँनी जीवन का जीवन्त चित्र आँका है। यह प्रेमकथा दलिद्दर से लेकर दिव्य तक का हर स्वर छोड़ती है लेकिन वह ठहरती हर बार उस मध्यम पर है जिसका नाम मध्यवर्ग है। एक प्रकार से मध्यवर्ग ही इस उपन्यास का मुख्य पात्र है। जिन सुधी समीक्षकों ने कसप को हिन्दी के प्रेमाख्यानों में नदी के द्वीप के बाद की सबसे बड़ी उपलब्धि ठहराया है, उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि जहाँ नदी के द्वीप का तेवर बौद्धिक और उच्चवर्गीय है, वहाँ कसप का दार्शनिक ढाँचा मध्यवर्गीय यथार्थ की नींव पर खड़ा है। इसी वजह से कसप में कथावाचक की पंडिताऊ शैली के बावजूद एक अन्य ख्यात परवर्ती हिन्दी प्रेमाख्यान गुनाहों का देवता जैसी सरसता, भावुकता और गजब की पठनीयता भी है। पाठक को बहा ले जाने वाले उसके कथा प्रवाह का रहस्य लेखक के अनुसार यह है कि उसने इसे ‘‘चालीस दिन की लगातार शूटिंग में पूरा किया है।’’ कसप के संदर्भ में सिने शब्दावली का प्रयोग सार्थक है क्योंकि न केवल इसका नायक सिनेमा से जुड़ा हुआ है बल्कि कथा निरूपण में सिनेमावत् शैली प्रयोग की गई है।



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